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साँसे-

कुछ चलती है, तो कुछ रूकती है…
और इन्हीं चलती साँसों को हम ज़िन्दगी कहते हैं। 


“साँसे मेरी चलती रहें, सदियों तक मेरी-तुम्हारी कहानी चलती रहे। तुम्हारे साथ जितनी बार मैंने साँसे ली हैं, मेरी ज़िन्दगी के सबसे खूबसूरत पल मैंने जीए हैं। तुम्हारी-मेरी कहानी, हमारी बन जाए और साँसे हमारी यूँ ही एक साथ चलती रहें। जब तक मेरी साँसे चलती रहेगा, तुम्हारे लिए मेरे दिल में प्यार ज़िन्दा रहेगा। जब-जब मैं साँस लेता रहूँगा, तुम्हें प्यार करता रहूँगा।“
आशिक़ी, प्यार, मोहोब्बत इन सब बातों से विवान, जो दूर था, कब उस बोझिल आँखों वाली, नियति के प्यार में पागल हुआ, उसे खुद पता नहीं चला। विवान ने तो सबसे पहले नियति से दोस्ती की और वह दोस्ती उसने आठ सालों तक बखूबी निभाई। विवान का डॉक्टर बनने का सपना जब पूरा हुआ, तो उसने तय किया, कि उसी दिन वह नियति के पास जाकर उसे अपनी फीलिंग्स बताएगा। मगर कहानी ने यहाँ अलग ही रूप ले लिया, जब विवान का दिल बुरी तरह से टूट गया। उस टूटे दिल का दर्द विवान सह नहीं पाया। विवान के दोस्त भी कहते थे, कि डॉक्टर विवान ने प्यार नहीं आशिक़ी की है। और शायद इसीलिए वह नियति को भूला नहीं पाता था और वह भूलना भी नहीं चाहता था। डॉक्टर विवान को नई उम्मीद मिली, जब एक नन्ही सी जान उसके हाथों इस दुनिया में आई। वह साँसों की अहमियत जान गया और अपने तरीके से नियति से प्यार करता रहा। कहानी ने फिर एक बार नया रूप ले लिया, जब विवान को दूसरे हॉस्पिटल में पोस्ट किया गया। वहाँ फिर उन बोझिल आँखों ने उसे घायल किया। वहाँ उसकी मुलाक़ात उन बोझिल आँखों वाली से कैसे हुई और आगे कहानी में क्या हुआ? यह जानने के लिए आप इस कहानी को जरूर पढ़िए। विवान के पहले प्यार की कहानी है, और साथ ही साथ उसके जिगरी दोस्तों की भी कहानी है और उन बोझिल आँखों वाली की कहानी है।

Saanse / साँसे

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